Wednesday, August 8, 2018

पाकिस्तान चुनाव : सोने का नहीं, कांटों का ताज है पीएम की कुर्सी


 अब से बस कुछ दिन बाद पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इमरान खान नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। उन्होंने चुनाव कैंपेनिंग के दौरान अपने कौम को एक 'नया पाकिस्तान' देने का वादा किया है । मौजूदा समय में पाकिस्तान भारी कर्ज में डूबा हुआ है, मुद्रास्फीति के कारण महंगाई आसमान छू रही है, दहशतगर्दी लगातार बढ़ती ही जा रही है, अपराध के मामले दिन-प्रतिदिन नए रिकॅार्ड कायम कर रही है और वैश्विक स्तर पर भी पाकिस्तान की साख पर लगातार सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं । ऐसे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात में इमरान खान के सामने कई मुश्किलें हैं जिन्हें दुरुस्त करना उनके लिए एक गंभीर चुनौती है।



पाकिस्तान में 1970 में पहली बार आम चुनाव हुआ जिसमें शेख मुजीबउर्र रहमान की पार्टी अवामी लीग को सबसे अधिक सीट जीतने के बावजूद सरकार बनाने नहीं दिया गया। सैन्य ताकतों के सामने पाकिस्तान का तंत्र कमज़ोर पड़ गया और यह चुनाव महज एक प्रतियोगिता साबित हुआ। इसके बाद से पाकिस्तान की सियासी हालात बिगड़ती चली गई और 1971 में पूर्वी पाकिस्तान एक नया राष्ट्र बांग्लादेश बनकर विश्व के मानचित्र पर स्थापित हुआ।


सैन्य शक्तियों का दबदबा शुरुआत से ही पाकिस्तान की राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। ऐसा माना जाता है कि जिसे सैन्य समर्थन हासिल है उसे सत्ता में आने से कोई नहीं रोक सकता। इस बार के चुनाव में भी इमरान खान पर सेना का समर्थन हासिल होने का आरोप तमाम विपक्षी पार्टियों ने लगाया, 2013 के चुनाव में इमरान खान ने यही आरोप नवाज़ शरीफ पर भी लगाया था।




पाकिस्तान के इस आम चुनाव में इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ नेशनल असेम्बली के 272 सीटों में से 116 सीटें जीतकर देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस चुनाव में जहां नवाज़ शरीफ की पार्टी को सिर्फ 64 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, वहीं पीपीपी केवल 43 नशीस्तों पर ही अपनी कामयाबी दर्ज करवा पाई। पाक के नेशनल असेंबली में कुल 342 सीटें हैं जिनमें से 272 सीटें जनरल और 60 सीटें महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित होते हैं।




इस बार के पाकिस्तान के आम चुनाव पिछले सालों में हुए चुनावों के मुकाबले कई मायनों में अलग था क्योंकि इसी चुनावी माहौल के बीच पनामा पेपर केस की सुनवाई हुई जिसमें पाकिस्तान के पूर्व PM नवाज शरीफ को 10 साल और उनकी बेटी मरियम नवाज को 7 साल की सजा सुनाई गई। जिसके बाद से नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल (एन) पूरी तरह से नेतृत्वहीन हो गई और इसका सीधा फायदा पीटीआई को पहुंचा।



यहां किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 172 सीटों की जरूरत होती है लेकिन इस आंकड़े के आसपास भी कोई पार्टी नहीं पहुंच पायी। हालांकि पीटीआई ने दावा किया है कि वो ये संख्या जुटा लेगी लेकिन इस जादूई आंकड़े तक पहुंचना इतना आसान भी नज़र नहीं आता।




जहां एकतरफ पीटीआई सरकार बनाने के लिए सियासी जोड़-तोड़ की गणित सुधारने में लगी है वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियां चुनाव में धांधली का आरोप लगा रही है साथ ही फिर से चुनाव कराने की मांग कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इमरान खान किन दलों के साथ मिलकर अपना प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा करते हैं।





पिछले एक साल से राजनीतिक उथल-पुथल के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार गिरती ही चली जा रही है। डाॅलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया काफी कमजोर हो गया है। आज एक अमरीकी डाॅलर लगभग 123 पाकिस्तानी रूपए के बराबर है। ऐसी अटकलेंं भी लगाई जा रही हैं कि पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का दरवाजा खटखटा सकता है। मीडिया में ये खबर आते ही अमेरिका के विदेश मंत्री माईक पाॅम्पियो का बयान सामने आया जिसमें उन्होंने आईएमएफ को पाकिस्तान को कर्ज देने को लेकर चेताया और सोच-समझकर फैसला लेने की बात कही। हालांकि पाकिस्तान की तरफ से अभी तक आईएमएफ को आर्थिक मदद के लिए कोई आधिकारिक पत्र नहीं भेजा गया है।




पिछले कुछ सालों में भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में काफी कड़वाहट आई है।सर्जिकल स्ट्राइक और कुलभूषण जाधव का मामला इन दो सालों में काफी चर्चित रहा।अभी भी पाकिस्तान की ओर से लगातार युद्ध विराम का उल्लंघन हो रहा है। भारत के साथ संबंधों को लेकर इमरान खान कितने गंभीर हैं ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन कुछ बेहतर और सकारात्मक कदम वो उठाएंगे कम से कम इतनी उम्मीद तो हम कर ही सकते हैं।