क्या हिन्दू क्या मुसलमान सब पुतले हैं मोम के
कब साम्प्रदायिकता में पिघल जाएं
हालात इतने पतले हैं कौम के
आज धर्म एक जंग लग रहा
कल वजूद के लिये तरसोगे
जिस धर्म के लिए लड़ाई किए तुमने
वो धर्म ढूंढते फिरोगे
फिर न कोई तेरा होगा
न कोई मेरा होगा
कलयुग कहो या कहो कयामत
जिस दिन आएगा सब खा जाएगा
फिर करते रहना मजहब और धर्म की बातें
इंसान तो रहोगे मगर इंसानों की तरह जीना भूल जाओगे।
~स्पर्श गौरव