Wednesday, January 24, 2018

अमानव स्त्री


अमानव स्त्री-

मैं एक अमानव स्त्री हूँ लेकिन मानव मुझे पूजते हैं और मेरी सेवा करते हैं.मैं शुद्ध शाकाहारी खाना खाती हूँ लेकिन कई लोगों का मांसाहार हूँ. बचपन में मेरी माँ के दूध पर मुझसे ज़्यादा किसी और का हक़ था वो ही तय करते थे की मैं कितना दुध पियूँगी. मेरी माँ के वक्षस्थल को न जाने कितने लोग मिलकर सुबह शाम दुहते थे.मैं चुपचाप खड़ी एक बंधन में कैद अपनी माँ के वक्षों पर हुए आघातों से बने घाव को बस देखती रहती और अपनी गीली आँखों से अपनी भूख मिटाया करती.मेरी माँ ने मेरे से कहीं ज़्यादा उन दूध के सौदागरों के बच्चे को पाला और ये दूध के सौदागर वही मानव हैं जो हम अमानवों की पूजा करते हैं और हमें गौमाता कहकर पुकारते हैं.

स्त्री के बारे में मैथिशरण गुप्त ने सही कहा है -

“अबला तेरी हाय यही कहानी- आँचल में है दूध और आँखों में पानी”

Monday, January 22, 2018

लॉस्ट आइडेंटिटी..


 भारत में गाय किसी के लिए पूजनीय है तो किसी के मुंह का निवाला तो किसी के लिए वोट बैंक।हिन्दू धर्म में गाय को सभी पशुओं  में सबसे श्रेष्ठ और पवित्र  माना गया है। भारत में गाय को माँ का दर्ज़ा दिया गया है क्योंकि गाय का दूध माँ के दूध के समान ही पौष्टिक होता है. आज के सन्दर्भ में देखें तो यह सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला एक राजनैतिक पशु है. जो पहले धार्मिक मान्यताओं के कारण जाना जाता था आज वह राजनीति का अखाड़ा तैयार करने के लिए मशहूर है.यह अहिंसक पशु होते हुए भी समाज के लिए हिंसक होता जा रहा है.गाय के नाम पर आये दिन दंगे फसाद होते रहते हैं. आज गाय धर्म और राजनीति की एक नई हथियार बन चुक है.जिस गाय का दूध मानसिक विकास में सहायक होता है आज वही गाय कुछ लोगों के मानसिक विकृति का कारण बन गय है. प्राचीन समय में जो गाय की पहचान थी वह आज कहीं धूमिल हो चुकी है .अतः  अब हमें गाय पर लड़ने की बजाय उसकी खोयी हुई पहचान वापस दिलाने की अधिक जरूरत है.